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JAN JAN KI AWAZ BANEGA – KALTAK US Deploys Truck Mounted Missiles In Iran:ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आया है कि कतर के अल-उदीद बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को स्थायी लॉन्चर की जगह ट्रकों पर तैनात किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग बेस पर विमानों और सैन्य उपकरणों की संख्या भी बढ़ी है। यह बदलाव जनवरी के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है। आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है।जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया।क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ। Breaking News : पंचायत चुनाव से पहले बनाया जाएगा समर्पित आयोग | UP Panchayat Election 2026 | CM Yogi लोकसभा में गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी का शानदार भाषण ‘ ना छेड़ो तुम ‘ ! Samajwadi Akhiesh

India USA Trade Deal : अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील के ऐलान के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया था….और कहा था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा…इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या भारत अपनी नीति बदलने जा रहा है…लेकिन इस पर भारत की ओर से जवाब आने में ज्यादा देर नहीं लगी

https://youtu.be/8nFoFq676T0

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने जवाब में प्रधानमंत्री ने खुद के खिलाफ लगाए गए कब्र खोदने के नारों के बहाने अपनी नीतियों और विपक्ष के एजेंडे का फर्क बताने की कोशिश की थी, जबकि इधर, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एम एम नरवणे की किताब पर हिसाब-किताब से पीछे नहीं हट रहे. कांग्रेस जहां लोकसभा में प्रधानमंत्री की स्पीच न हो पाने के बाद लोकसभा को झांकी बता रही है.

https://youtu.be/lHDNOPUyd9A

Rashtra Ki Baat : ‘महाभियोग’ लाएगा ‘INDIA’… क्या करेंगे CEC ? Manak Gupta के साथ LIVE | Mamata

https://youtu.be/mK87f_pZPBI

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आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है।जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया।क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।

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