वॉयस ऑफ शताब्दी
संतकबीरनगर। जनपद के ऐतिहासिक बरदहिया बाजार में पटरी पर दुकान लगाने के मामले में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष व नगर पालिका पटरी व्यवसाई समिति के पदाधिकारी श्रवण अग्रहरि की पहल पर बात बन गई है। एडीएम मनोज कुमार सिंह ने पटरी व्यवसाइयों के लिए सड़क पर चिन्हांकन करके एक पट्टी बनाने की बात कही। जिसके अंदर ही व्यापारी अपना व्यापार सड़क के किनारे करेंगे। इस दौरान बरदहिया बाजार में स्वस्थ माहौल बनाने पर भी व्यापक चर्चा की गई।

बरदहिया बाजार के व्यापारियों की समस्या को लेकर अपर जिलाधिकारी मनोज कुमार सिंह तथा अधिशासी अधिकारीए नगर पालिका परिषद खलीलाबाद से अपर जिलाधिकारी के कार्यालय में बैठक कर समस्या के समाधान हेतु व्यापक विचार विमर्श किया गया । इस बैठक में बरदहिया बाजार में व्यापारियों के उत्पीड़न रोकने तथा पटरी पर दुकान लगाने के संदर्भ में मानक निर्धारित करने पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रथम चरण में मुख्य मार्ग पर पटरी पर सफेद पट्टी बनाने हेतु सहमति बनी। इसके साथ ही अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा मांग की गई कि बरदहिया बाजार व्यापारियों के लिए अलग से नगर पालिका द्वारा बाजार लगाने हेतु जगह आवंटित किया जाए तथा इसके लिए तत्काल जगह को चिन्हित कराया जाए।

बाजार में अंतर प्रांतीय रेडीमेड गारमेंट्सए होजरी गुड्स के व्यापार को देखते हुए तथा जनपद में वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट में होजरी गुड्सए रेडीमेड गारमेंट्स को शामिल होने के कारण इस व्यवसाय के प्रोत्साहन हेतु व्यापारियों को व्यवसायिक सुविधा प्रदान कराने हेतु योजना बनाने का अनुरोध किया गया जिससे इस व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जा सके। इसको संबंधित अधिकारियों ने स्वीकार करते हुए इस संदर्भ में व्यापक योजना बनाने हेतु सहमति व्यक्त किया तथा संगठन को आश्वस्त किया कि इस दिशा में प्रयास शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा तथा व्यापारियों को व्यापार करने हेतु स्वस्थ माहौल प्रदान किया जाएगा।

इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जैनए जिला महामंत्री विनीत चड्ढाए पेशकार अहमदए नगर अध्यक्ष महमूद अहमदए विकास गुप्ताए देवेश चड्ढाए शिवकुमार यादवए आकाश जायसवालए सूर्यभान सिंह श्रीनेत के साथ ही अन्य लोग उपस्थित रहे।🔊 खबर को सुनें

 

 

By admin

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आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है।जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया।क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।

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